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2009/02/25

सत्याग्रह करने वालों पर दर्ज हो रहे झूठे केस : सुनील

हरदा। प्रदेश सरकार पूरी तरह से पूंजीपतियों की दलाल और मजदूर एवं गरीब विरोध बन चुकी है। पूंजीपतियों के 48 घंटे के अल्टीमेटम पर सजप की प्रदेश उपाध्यक्ष शमीम मोदी को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि हम्मालों, मजदूरों की जायज मांगों पर महीनों तक कोई सुनवाई नहीं होती। इससे पता चलता है कि सरकार द्वारा सत्याग्रह करने और गरीबों की आवाज उठाने वालों पर झूठे प्रकरण दर्ज कर उन्हें जेल में डाला जा रहा है। यहे बातें सजप के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील ने यहां पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहीं।सजप के स्थानीय कार्यालय में मंगलवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में सजप के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील ने कहा कि राज्य सरकार शमीम पर झूठे केस दर्ज कर उसे जेल भेजकर मजदूरों और श्रमिकों की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि शमीम पर एक मामले में अपहरण, जानलेवा हमला, जान से मारने की धमकी देने सहित करीब 11 धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है, जिसे देखकर ऎसा लगता है कि प्रशासन उन्हे खूंखार अपराधी के तौर पर प्रदर्शित करना चाहता है। 20 को होगा प्रदर्शनसजप की प्रदेश उपाध्यक्ष शमीम मोदी की गिरफ्तारी के विरोध में 20 फरवरी को भोपाल एवं जबलपुर में प्रदर्शन किया जाएगा। भोपाल में होने वाले प्रदर्शन में हरदा जिले के अलावा होशंगाबाद, बैतूल एवं खंडवा जिले के मजदूर, आदिवासी महिला और पुरूष एवं सजप कार्यकर्ता शामिल होंगे। सीएम को लिखे जाएंगे एक हजार पोस्टकार्डशमीम मोदी की गिरफ्तारी के विरोध में पोस्टकार्ड अभियान शुरू की गया है। इसके तहत जिले के मजदूर, आदिवासी महिला और पुरूष प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को एक हजार पोस्टकार्ड लिखेंगे। मजदूरों के हितों का ध्यान रखे प्रशासनहरदा। सजप के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील ने कहा कि प्रशासन और राज्य सरकार को मजदूरों के हितों का ध्यान रखना चाहिए। अघिकारियों को जनता के अघिकारों की रक्षा करनी चाहिए, जबकि जिला प्रशासन पूंजीपतियों के इशारों पर काम कर रहा है। सुनील मंगलवार शाम को नारायण टॉकीज चौक पर आयोजित नुक्कड सभा को संबोघित कर रहे थे। मालूम हो कि मजदूर संगठन की प्रदेश उपाध्यक्ष शमीम मोदी की गिरफ्तारी और अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। धरने में शामिल हुए सुनील ने कहा कि गरीब आदिवासियों और मजदूरों की आवाज उठाने का खामियाजा शमीम को भुगतना पड रहा है। उन्होंने कहा कि मजदूरों को उनकी निर्घारित मजदूरी और उनके अघिकारों के लिए लडना अन्याय नहीं है। जिले के आरा मिल मालिक श्रमिकों का शोषण कर रहे हैं। उन्हें निर्घारित मजदूरी से कम पैसा दिया जाता है। धरने में मंगलवार को आरा मिल श्रमिक शामिल थे।

18 फ़र 2009
http://www.patrika.com/news.aspx?c=0&id=127629

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